अपने समय की बेबाकी और बेफ़िक्री को उड़ेलती इन अतरंगी कहानियों का मूल कथा-स्वर मानव मन और मस्तिष्क की मुठभेड़ है। स्त्री और प्रकृति से उपजा इकोफ़ेमिनिस्ट विमर्श, यिन यांग के घेरे, जंगल और उसके रहवासियों के सुलझे-अनसुलझे रहस्यों की गुत्थी एक नया तिलिस्म गढ़ती है और भीतर के प्रतिमान भी चिह्नित करती है। स्मृति और समय में आवाजाही करती हुई ये कथाएँ बीते समय की गहरी खोह में छिपे अनूठे पात्र-सहपात्र और आधुनिक पीढ़ी के पात्रों का सुघड़ परिवेश संग एक कलात्मक संयोजन है। आपसी मानवीय लाग की ये कथाएँ अपने सुंदर भाषा-शिल्प, नए कथानक और सहज रूप से ही दृश्यात्मक परिवेश रचते हुए देर तक पाठक के साथ बनी रहती हैं।