अनवर शऊर की शायरी में शामिल विषय बहुत ही संवेदनशील प्रकृति के हैं, जो इंसान के आंतरिक और बाहरी मुआमलों के साथ संवाद करते हैं। उनकी शायरी में रूमानवियत और सौन्दर्य की छाप स्पष्ट रूप से महसूस किए जा सकते हैं। आदमी, तिलिस्म, इंतज़ार, धोका, जुस्तजू, शराब, शाम, रात, ग़म, तलाश, ज़हर, सोहबत, हमदम, ज़िन्दाँ, सय्याद, बदन, हैरत, सफ़र, मशक़्क़त जैसे विषयों की गहराई से उनकी शायरी भरी हुई है। अनवर शऊर धीमे लहजे के मालिक हैं, उनकी शायरी में मदहोशी की अवस्था अपनी सरमस्ती से महक रही होती है। ग़ज़ल के रूमानी शायर होने के बावजूद उनकी एक अलग शनाख़्त क़ता लेखक की भी है। ज़िंदगी के रोज़मर्रा के विषयों को एक क़ता में समो देने का हुनर उन्हें ख़ूब ख़ूब आता है।