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Poems

Advaitvadini Kuchh Kah Rahi Hai

V
Author: Vijay Shankar
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कविता-संग्रह ‘अद्वैतवादिनी कुछ कह रही है’ की कविताएँ अतिसंवेदनशीलता के समंदर में मोतियों की तरह हैं जिसकी चमक को पाने के लिए पाठक को गहराई में उतरना पड़ता है। छोटे-छोटे शब्दों में बड़ी-बड़ी बातों वाली कविताएँ कह लेना एक कौशल है जो विजय शंकर के पास था। उनकी कविता में जहाँ सामयिक भावों को पकड़ने का हुनर था तो वहीं भविष्य की ओर देखने का इशारा भी था। ‘दूसरे और तीसरे/ जीवन की चाह में/ पहला और/ शायद/ अनिवार्य जीवन/ फिसल रहा है...’ काव्य-पंक्तियाँ इस बात की तस्दीक करती हैं कम मगर संतुलित बोलने वाले कवि की आदत की तरह ही इनकी कविताओं में भी कम शब्दों की ज़रूरत होती है।
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