"दुनिया में हम आए हैं तो जीना ही पड़ेगा, जीवन है अगर जहर तो पीना ही पड़ेगा" जन्म भले ही हमारे हाथ में ना हो पर जीना हमारी मजबूरी है। परिस्थितियां कितनी भी जटिल हों!परिस्थितियों का सामना करने के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं होता। उन्हें बस बहना होता है धारा के साथ! बहाव जहाँ ले जाए, उछाले,पछाड़े,वे तो सिर्फ सहने के लिए बने होते हैं! ऐसा ही कुछ कलेवर अपने में समेटे है,मेरा लघु उपन्यास "आखिरी विकल्प" सत्य घटना पर आधारित ऐसा कथानक जिसे मैंने भोगा तो नहीं पर पात्रों के साथ जिया जरूर है। "आसमाँ अभी बाकी है" के बाद मेरी दूसरी कृति "आखिरी विकल्प" आपके सामने है।