विनोद अग्निहोत्री जी को मैं पिछले चार दशकों से जानता हूँ। वे एक गम्भीर और संवेदनशील पत्रकार हैं। उन्होंने देश के सामाजिक बदलावों और जन-आन्दोलनों का सूक्ष्म अध्ययन किया है और उनके बारे में लगातार लिखा है। किसी भी लोकतन्त्र की सुदृढ़ता और गतिशीलता के लिए सामाजिक सरोकारों के मुद्दों पर आम जनता की भागीदारी तथा एकजुट होकर संवैधानिक तरीके से अपनी माँगें उठाते रहना जरूरी होता है। यह पुस्तक इन प्रक्रियाओं का एक महत्त्वपूर्ण दस्तावेज है जो सत्ता प्रतिष्ठानों के लिए आईना और युवा पीढ़ी में अन्याय के खिलाफ चुप्पी तोड़कर सत्य और न्याय के लिए अहिंसात्मक तरीके अपनाने की प्रेरणा देगा। – कैलाश सत्यार्थी नोबेल पुरस्कार विजेता