हिन्दी में मूर्धन्य लेखकों और कलाकारों की सुशोधित और विस्तृत जीवनियाँ नहीं हैं।
कुछ वर्ष पहले रज़ा फ़ाउण्डेशन ने ऐसी जीवनियाँ लिखाने और प्रकाशित करने की योजना शुरू की। उसके अन्तर्गत अब तक जैनेन्द्र कुमार, जगदीश स्वामीनाथन, नागार्जुन, शंखो चौधरी, कृष्णा सोबती, फणीश्वरनाथ रेणु, भूपेन खख्खर आदि की जीवनियाँ प्रकाशित हो चुकी हैं। इसी क्रम में बनारस-रमे विद्वान और सजग रंग-समीक्षक सत्यदेव त्रिपाठी द्वारा लिखी गयी जयशंकर प्रसाद की यह जीवनी प्रकाशित करते हुए हमें प्रसन्नता है। एक मूर्धन्य कवि, उसके निजी और सर्जनात्मक-बौद्धिक संघर्ष, उनकी जिजीविषा और दुखों आदि के बारे में जानकर हम प्रसाद की महिमा और अवदान को बेहतर समझ-सराह पाएँगे ऐसी आशा हम करते हैं।