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Indigo Books
Novel

Ayachi Ki Khoj Mein

B
Author: Bibhutibhushan Mukhopadhyaya
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₹245.00 ₹275.00
Paperback
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‘अजाचीर संधान’ (अयाची की खोज में) बिभूतिभूषण मुखोपाध्याय की ऐसी महत्त्वपूर्ण कृति है, जिसमें अयाची मिश्र की कथा के माध्यम से मिथिला की ज्ञान-साधना, उसकी नैतिक ऊँचाइयों और बौद्धिक गरिमा का अत्यन्त सजीव एवं मार्मिक रूप उद्घाटित हुआ है। लेखक ने एक शिक्षक के आत्मसम्मान, सरस्वती-साधना के प्रति उसके अविचल समर्पण, ज्ञानदान की नैतिकता के प्रति उसकी अडिग निष्ठा तथा मिथिला की विशिष्ट दार्शनिक परम्परा को बड़ी संवेदनशीलता और कलात्मक सन्तुलन के साथ एक सूत्र में बाँधा है। किसी भी दर्शन को उसके वास्तविक अर्थ में समझने के लिए उसके सिद्धान्तों की जानकारी भर पर्याप्त नहीं होती; उसके जीवन-अभ्यास, साधना-परम्परा और उस सामाजिक-सांस्कृतिक परिवेश को समझना भी उतना ही आवश्यक है, जिसमें वह दर्शन अपनी वास्तविक जीवन्तता प्राप्त करता है। इस दृष्टि से यह कृति केवल एक कथात्मक आख्यान नहीं, बल्कि न्यायदर्शन की एक विलक्षण विभूति के माध्यम से भारतीय ज्ञान-परम्परा के मूर्त जीवन-संसार तक पहुँचने का सशक्त सेतु भी है। ‘अयाची के गाँव’ पर शोध के दौरान मुझे अयाची मिश्र के जीवन-चरित्र और न्यायदर्शन में उनके अप्रतिम अवदान को निकट से जानने का अवसर मिला था। उस समय न तो यह पुस्तक सुलभ थी और न ही मुझे बांग्ला का पर्याप्त ज्ञान था। ऐसे में मृत्युंजय जी का यह सधा हुआ, अत्यन्त महत्त्वपूर्ण अनुवाद रेखांकित किये जाने योग्य है। निस्सन्देह, इस अनुवाद के माध्यम से भारतीय ज्ञान-परम्परा पर कार्य कर रहे हिन्दी और मैथिलीभाषी शोधकर्ताओं को न केवल नयी और मूल्यवान सामग्री उपलब्ध होगी, बल्कि मिथिला के एक समृद्ध बौद्धिक लोक तक उनकी पहुँच भी अधिक सहज, व्यापक और सार्थक बन सकेगी। – मणीन्द्र नाथ ठाकुर
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