ओमप्रकाश कश्यप दर्शन और आलोचना साहित्य के प्रखर विद्वान् हैं। उन्होंने शोधपरक अनेक ग्रन्थ तो रचे ही हैं, कथा साहित्य और बालसाहित्य भी भरपूर लिखा है। 'बचपन और बालसाहित्य के सरोकार' शीर्षक प्रस्तुत पुस्तक भी उनकी तर्कशील शोधपरक दृष्टि का प्रमाण है। इससे पूर्व बालसाहित्य की आलोचनात्मक कृतियों के साथ-साथ वे 'परीकथाएँ एवं विज्ञान लेखन' जैसी विचारपूर्ण कृति साहित्य जगत् को दे चुके हैं। इस पुस्तक में उन्होंने बालकों के क्रियाकलाप के परिप्रेक्ष्य में लगभग सभी मनोवैज्ञानिक मुद्दों पर चर्चा की है। यथा, हिन्दी बालसाहित्य की यात्रा का विहंगावलोकन उन्होंने वैदिक काल से प्रारम्भ किया है। साहित्य में बचपन की दस्तक को रेखांकित करते हुए उन्होंने बालसाहित्य की मुख्य प्रेरणाओं, बालसाहित्यिक चेतना के उभार आदि पर दृष्टिपात करते हुए आधुनिक युग में बाल साहित्य की मुख्य प्रवृत्तियों और चुनौतियों की भी चर्चा की है। तीसरे अध्याय में बालसाहित्य के विभिन्न सरोकारों की चर्चा है। 'बालसाहित्य और बचपन' शीर्षक अध्याय में शिक्षा के बाजारीकरण से लेकर मनोरंजन की राजनीति तक 12 विभिन्न बिन्दुओं पर अपने विचार रखे हैं। 'हिन्दी बालसाहित्य और आधुनिकता बोध' शीर्षक अध्याय में इण्टरनेट की खूबियों और खामियों पर विचार व्यक्त किये हैं तथा 'बालसाहित्य और विज्ञान लेखन' अध्याय में विज्ञान लेखन और नैतिकता पर विमर्श प्रस्तुत किया है। इसी में हमें यह संकेत भी मिलता है कि बालमन पर जितना सटीक और स्थायी प्रभाव छन्दयुक्त कविता और सरल भाषा में कही गयी कहानी का पड़ता है, उतना किसी अन्य विधा का नहीं। बालसाहित्य के गम्भीर अध्येताओं के लिए यह एक आवश्यक पुस्तक है। -डॉ. बलराम अग्रवाल