हर डायरी की अपनी पृष्ठभूमि होती है, निश्चित कालखण्ड होता है। एक व्यक्तित्व उसके केन्द्र में रहता है। समय, विषय और व्यक्तित्व से कटकर वह अर्थहीन हो सकती है। यह नहीं कहा जा सकता कि हर डायरी अपने समय का प्रतिनिधित्व करती है, उसका दस्तावेज़ होती है, पर उसमें नयेपन की उम्मीद होती है।