भारत के हर क्षेत्र, हर समाज में और हरेक अवसर पर फूलों का बहुत महत्त्व है। फूलों में सबसे अधिक पवित्र और पावन माना जाता है कमल का फूल। चाहे कोई पूजा-अर्चना हो, किसी देवी-देवता की तस्वीर या प्राचीन मूर्ति या फिर ऐतिहासिक इमारत - कमल का फूल यहाँ अक्सर पाया जाता है। कमल के फूल का महत्त्व न केवल हिन्दू धर्म में है बल्कि बौद्ध और जैन धर्म में भी है। मुगल काल में बनाये गये ताजमहल और हुमायूँ के मकबरे के गुंबद पर कमल-पंखुड़ियाँ और शीर्ष पर उल्टा कमल देखने को मिलता है। प्राचीन से आज के वर्तमान समय तक, अपने अनूठे ढंग से देवदत्त पट्टनायक ने, कमल के फूल की गाथा लिखी है - जो रोचक तो है ही, साथ ही ज्ञानवर्धक भी है।
पौराणिक कहानियों, मिथकों, संस्कारों और रीति-रिवाजों का आधुनिक ज़िन्दगी में महत्त्व के विषय पर देवदत्त पट्टनायक 1996 से लगातार लिखते आ रहे हैं और अब तक उनकी 50 पुस्तकें और 1000 से अधिक स्तम्भ प्रकाशित हो चुके हैं। वे कई टीवी चैनल और कम्पनियों के लिए लीडरशिप और शासन-विधि के क्षेत्र में सलाहकार के रूप में काम करते हैं। ‘देवलोक’ और ‘बिज़नेस सूत्र’ उनके लोकप्रिय टीवी कार्यक्रम हैं। शिव के सात रहस्य, विष्णु के सात रहस्य, देवी के सात रहस्य, भारतीय पौराणिक कथाएँ, भारत में देवी, पशु, सीता के पाँच निर्णय, शिव से शंकर तक, ओलिम्पस, महाभारत के योद्धा और गरुड़ पुराण उनकी अन्य बहुचर्चित पुस्तकें हैं। लेखक के बारे में www.devdutt.com पर आप और अधिक जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।