"भारतीय संगीत वाद्य - भारतीय संगीत वाद्यों की विविधता ने, उनकी सर्जना के शिल्पगत चमत्कार ने और उनके विकास की प्रभावक परम्परा ने विश्व को मोहा तो है किन्तु उनके स्वरूपात्मक एवं प्रयोगात्मक विवेचन का क्रमबद्ध इतिहास सदा ही दुर्लभ रहा है। इस विषय के निष्णात विद्वान, अन्वेषक और मर्मी संगीतज्ञ डॉ. लालमणि मिश्र ने इस दिशा में ऐसा अद्भुत कार्य किया है कि उनके अध्ययन की गहराई, विश्लेषण की क्षमता और कर्मठ अध्यवसाय के अद्भुत परिणाम को देखकर आश्चर्यचकित रह जाना पड़ता है। डॉ. मिश्र ने प्रस्तुत ग्रन्थ में वैदिक काल से लेकर आधुनिक युग तक के भारतीय संगीत वाद्यों के विकास-क्रम का विशद विवेचन किया है, साथ ही इसमें साहित्य, संगीत, धर्मग्रन्थों और प्रस्तरकला एवं चित्रकला के क्षेत्रों में उपलब्ध सामग्री का भी समावेश किया है। "डॉ. लालमणि मिश्र - जन्म: 11 अगस्त, 1924, कानपुर। शिक्षा: एम.ए., साहित्यरत्न, पीएच.डी., एम. म्यूज़, (गायन), बी. म्यूज़ (सितार-तबला), 'संगीतेन्दु', डी. म्यूज़ (वीणा)। संगीत एवं ललित कला संकाय, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय, वाराणसी में प्रोफ़ेसर तथा वाद्य संगीत-विभागाध्यक्ष रहे। डॉ. मिश्र वैणिक, शास्त्रज्ञ तथा अनेक वाद्यों के कुशल वादक; नृत्याचार्य उदयशंकर के संगीत निर्देशक; संगीत की अनेक संस्थाओं के नियोजक व उन्नायक; शास्त्रीय कण्ठ-संगीत, वाद्य-संगीत एवं वृन्द-वादन की अनेक मौलिक बन्दिशों के रचयिता; श्रुति एवं चतुःसारणा दिग्दर्शक वीणा के निर्माता थे।