भीष्म साहनी एक कथाकार थे, पर मैं यह भी जानता हूँ कि उनकी शक्ति, उनके सन्दर्भ, शब्दों के माध्यम से अभिनवता और सामाजिक और राजनीतिक परिदृश्य में काम करने के कारण तर्कशक्ति में निहित थी और वह कभी भी आदेशात्मक न होकर एक ऐसे विषय में गूँजी थी जो मानवतावादी थी जिससे वे सामाजिक तनाव के ताने-बाने में चरित्रों और विश्वासों को ढालते थे। और आप जितने ज्यादा उसमें डूबते जाते हैं आप उनके विश्वासों के पूरे रंग देख सकते हैं। तर्क और कारण प्रगतिशील हैं, पर भीष्म साहनी आपको महसूस कराएँगे कि सामाजिक क्रान्ति के नेटवर्क से ही कार्य करना चाहिए और वैज्ञानिक समाजवाद के सिद्धान्तों के माध्यम से उन्होंने अपने कार्यों को यथार्थवादी रूप में प्रस्तुत किया। – इसी पुस्तक से