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Indigo Books
Psychology

Chini Darshan Ka Sankshipt Itihas

F
Author: Fung Yu-Lan
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₹549.00 ₹599.00
Paperback
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चीन के बारे में बहुत सारी पुस्तकें उपलब्ध होने के बावजूद हमारे पास उस देश के दर्शन के बारे में बहुत कम प्रामाणिक जानकारी है। प्रस्तुत पुस्तक निश्चय ही ऐसी पहली पुस्तक है जिसमें सही अर्थों में कनफ्यूशियस से शुरू होकर मौजूदा दौर के दार्शनिकों को लेते हुए चीनी चिन्तन का व्यापक और सुव्यवस्थित विवरण पेश किया गया है। इसके लेखक एक चीनी विद्वान हैं जिन्हें आमतौर पर उनके देश में इस विषय का अत्यन्त योग्य व्यक्ति समझा जाता है। इस पुस्तक की खास बात यह है कि यह पुस्तक विदेशी पाठकों को ध्यान में रखकर लिखी गयी है और इस वजह से विषय वस्तु को प्रस्तुत करने की इसकी शैली उस शैली से भिन्न है जिसका प्रयोग चीनी पाठकों के लिए किया जाता है। यह पुस्तक चीनी विचार पद्धति की दो प्रमुख धाराओं कनफ्यूशियसवाद और ताओवाद के बारे में जानकारी तो देती ही है साथ ही यह भी बताती है कि इन दोनों विचार पद्धतियों का विकास कैसे हुआ और इतिहास के किस कालखण्ड में इनका सबसे ज्यादा प्रभाव था। ईसा पूर्व पाँचवीं से तीसरी शताब्दी के बीच परस्पर प्रतिस्पर्धी अन्य विचार पद्धतियों में से ये महज दो थीं जो टिकी रह सकीं। उस अवधि के दौरान इतने सारे मतों का अस्तित्व था कि चीनी लोगों ने इसका उल्लेख ‘सौ विचार शाखाओं’ के रूप में किया है। चीन में दार्शनिक विचारधारा का विकास निजी तौर पर अध्यापन के जरिये हुआ। चीन के इतिहास में कनफ्यूशियस पहले ऐसे शिक्षक थे जिनके छात्रों की संख्या हजारों में थी और उनमें से कई सौ प्रसिद्ध विचारक और विद्वान बने। भारतीय पाठकों के लिए यह पुस्तक इसलिए भी बहुत महत्त्वपूर्ण है क्योंकि इसमें बताया गया है कि कैसे चीन में बौद्ध धर्म की शुरुआत इतिहास की महानतम घटनाओं में से एक थी और कैसे इसने खासतौर पर धर्म, दर्शन, कला और साहित्य को प्रभावित किया। हिन्दी के पाठकों के लिए चीनी दर्शन की विकास यात्रा को समझने में यह पुस्तक महत्त्वपूर्ण योगदान कर सकती है।चीन के बारे में बहुत सारी पुस्तकें उपलब्ध होने के बावजूद हमारे पास उस देश के दर्शन के बारे में बहुत कम प्रामाणिक जानकारी है। प्रस्तुत पुस्तक
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