यह पुस्तक देशभक्ति, राष्ट्रवाद और आधुनिक जीवन से जो सम्बन्ध है, उसकी गहरी पड़ताल करती है, इस पड़ताल में देशभक्ति, राष्ट्रवाद का इतिहास और भूगोल भी है। इसमें देश की विभिन्न प्रकार की ताकतों से उसकी मुठभेड़ को प्रमुखता से रेखांकित करने वाले आलेख सम्मिलित हैं। फासीवादी और ब्राह्मणवादी ताकतें भारत में देशभक्ति और राष्ट्रवाद की भावनाओं को उभारती हैं, भावनात्मकता, उत्तेजना का अपने फायदे के लिए इस्तेमाल करती हैं। भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वर्तमान उभार से इस भावात्मक उत्तेजना में जो गुणात्मक वृद्धि हुई है उसे यह पुस्तक खासतौर पर अपने अध्ययन के कैनन में रखती है। इस तरह यह राष्ट्रवादी चेतना का पक्ष नहीं, प्रतिपक्ष रचती है। आशा है यह पुस्तक, पुस्तक-प्रेमियों में समादृत होगी।