"...नाटककार ने पटकथा को इस तरह से बुना है कि ज्यादातर समय दर्शक हंसते रहते हैं, जीवन की वही विडम्बनाएं जो हम सब के लिए चिंतन का विषय बनती हैं, देखते–देखते जि़न्दगी को एक आनंदमयी अनुभव में ढलने का कारण बन जाती हैं ।...”
Publisher
Kautilya Books
Language
hindi
Pages
111
ISBN
9789390885381
Edition
-
Binding
-
₹199.00
₹260.00
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Wednesday, 04 November
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