विश्वप्रसिद्ध पुस्तक ‘इकिगाई’ के बेस्टसेलर लेखकद्वय हेक्टर गार्सिया और ़फ्रान्सेस्क मिरालेस के मुताबिक़ हमारा भावनात्मक स्वास्थ्य तथा सर्वांगीण कुशल-क्षेम अक्षुण्ण बना रहे इसके लिए मनुष्य और निसर्ग (प्रकृति) के बीच सामंजस्यपूर्ण संबंधों का होना अनिवार्य है। इसी संबंध की पुनर्स्थापना को नाम दिया गया है ‘वन-स्नान’। जब आप किसी प्राकृतिक स्थल पर जाकर शांत मन से खुद को वहाँ मौजूद पेड़-पौधों तथा अन्य प्राकृतिक उपादानों की ज़बरदस्त उपचारक ऊर्जा में नहाने देते हैं तो आपका सारा तनाव, सारी थकान और सारी व्याधियाँ स्वयमेव दूर हो जाती हैं और आप पुनः नवजीवन को प्राप्त करते हैं। उनका कहना है कि आपका घर या आपका कार्यस्थल चाहे कितनी भी भीड़ और शोर-शराबे से भरा हो, सप्ताहांत पर किया गया ‘वन-स्नान’ सप्ताह भर आपको तरोताज़ा रखता है, स्वस्थ रखता है, कार्य-कुशल बनाए रखता है। यदि आप नियमित तौर पर थोड़े-थोड़े समय के लिए वन-स्नान करते रहें तो आप सदा स्वस्थ, युवा एवं कार्य-कुशल बने रहेंगे। आज के दौर की भाग-दौड़ भरी ज़िन्दगी में अपनी ऊर्जा, उत्साह तथा स्वास्थ्य की बैटरी को रीचार्ज करते रहने वाली एकदम सहज व सरल पद्धति है ‘शिनरिन-योकु’, जिसे ‘वन-स्नान’ के माध्यम से अमल में लाने का एक सीधा-सादा तरीक़ा बताती है यह पुस्तक ‘फ़ॉरेस्ट बाथिंग’।