आपके अपने मनोवैज्ञानिक सॉफ्टवेयर को नए सिरे से प्रोग्राम करने के लिए एक उत्कृष्ट किताब 'डिजाइनिंग द माइंड : साइकीटेक्चर के सिद्धांत' यह किताब पढ़ना आपके मनोवैज्ञानिक विकास की गहराईयों में एक रोचक छलांग लगाने की तरह है। इसमें आंशिक तौर पर मनोवैज्ञानिक मेनीफेस्टो के साथ व्यावहारिक तौर पर आत्म- विकास गाइड भी शामिल है। यह सब मार्कस ऑरीलियस, लाओ त्सु, फ्रेडरिक नीत्शे और अब्राहम मास्लो जैसे महान चिंतकों की शिक्षाओं पर आधारित है। इस पुस्तक में जो विचार और तकनीकें दी गई है, वे लोगों को आत्म-संयम की ऊंचाईयों तक जाने और एक महान जीवन जीने में सहायता करते हैं। इस किताब में मन की तुलना एक सॉफ्टवेयर से की गई है। यह सॉफ्टवेयर अंदर ही अंदर गुंथे हुए अल्गोरिदमों के मेल से बना होता है, जो प्राकृतिक चुनाव से प्रोग्राम किया जाता है। हालांकि अधिकतर लोग कभी अपनी डिफाल्ट प्रोग्रामिंग को बदलना नहीं सीख पाते। इस प्रोग्राम को नए सिरे से लिखना, अंदर बसी आदतों को बदलना और भावात्मक प्रतिक्रियाओं को रूपांतरित करना आसान है। साइकीटेक्चर की प्रक्रिया आपको इस योग्य बनाती है। जिससे आप अपने मन से परे होकर भीतर बसे ढांचों को पहचानकर अपने ही विकास के शिल्पी बन सकते है। * आत्मनिरीक्षण के मूल्य और नियम * इच्छाएं और उन्हें व्यवस्थित करने की कुंजियां * भावात्मक संतुलन * सेल्फ-मास्टरी 'यह पहले ही मेरा जीवन बदल चुकी है और मुझे पता है कि यह दूसरों को भी बदल देगी।' - आरोन पर्किन्स, क्रिसलिस लीडरशिप की एक्ज़ीक्यूटिव कोच और संस्थापक 'एक आकर्षक ढांचा' - स्कॉट बैरी कॉफ़मैन, पीएचडी, ट्रांसेन्डः द न्यू साइंस ऑफ़ सेल्फ़ एक्चुलाइजेशन के लेखक