ज्ञानरंजन हिन्दी के वरिष्ठ कथाकार और संपादक रहे हैं। हिन्दी के वरिष्ठ से लेकर युवा और युवतर रचनाकारों तक में उनका सम्मान है, उनसे संवाद रहा है। प्रस्तुत पुस्तक उसी सम्मान और संवाद का पर्याय है। इसके पहले खण्ड में ज्ञानरंजन द्वारा समय-समय पर दिए गये साक्षात्कार, भाषण संकलित हैं तो दूसरे खण्ड में उनपर लिखे कुछ संस्मरण हैं।