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Indigo Books
Criticism

Jaishankar Prasad

A
Author: Abha Gupta Thakur
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₹270.00 ₹320.00
Paperback
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बीसवीं शताब्दी के प्रारम्भिक दशकों में जयशंकर प्रसाद के नाटकों से हिन्दी नाटकलेखन के एक नये अध्याय की शुरुआत होती है, और उनके निबन्धों से एक नयी रंगदृष्टि से परिचय मिलता है। नाटकलेखन में उन्होंने ऐतिहासिक शोध के भीतर से जीवन्त मानव की संघर्ष-यात्रा के अनेक पड़ावों का अंकन किया है। और अपने निबन्धों में उन्होंने हिन्दी रंगमंच की जातीय पहचान को पाने के लिए प्रेरित किया-ऐसा रंगमंच जो भारतीय सन्दर्भों में शास्त्रीय, पारम्परिक और पश्चिमी नाट्यों के व्यवहार और तत्त्वों के मेल से भारतीय नाट्यधर्मी शैली के एक नये मुहावरे को रेखांकित करे। इस प्रक्रिया में पारसी थिएटर और शेक्सपियर के अनेक रंगतत्त्व मिलते हैं, परन्तु संस्कृत नाटकों और पारम्परिक नाट्‌यों तथा इनके तत्त्वों में जो समानता है उससे ये तत्त्व आरोपित नहीं हैं, वरन् इस नयी रंगशैली को प्रदर्शनात्मक (थिएट्रिकल) आकर्षण के साथ गढ़ते हैं। – इसी पुस्तक से
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