आजकल कई पर्वतारोही इन दिव्य और बैकुण्ठी चोटियों का इस्तेमाल रिकॉर्ड बनाने या व्यावसायिक लाभ कमाने के लिए कर रहे हैं, लेकिन उनमें जुनून की कमी है। प्रकृति माँ इसका खामियाजा भुगत रही है। हमारे पहाड़ों के संरक्षण और सफ़ाई के लिए क़दम उठाने का राजिंदर का तरीक़ा क़ाबिले तारीफ़ है। मैं एवरेस्ट और उसके आसपास के इलाक़ों की सफ़ाई की कई परियोजनाओं का हिस्सा रहा हूँ। पहाड़ों को गन्दा करने में पर्वतारोहियों की उदासीनता देखकर मुझे बहुत दुख होता है। जैसा कि राजिंदर अरोड़ा कहते हैं, ‘ईश्वर सुन्दरता में है। ईश्वर प्रकृति में है, इसलिए इस सुन्दरता को भविष्य के लिए संरक्षित रखें।’ एक बेहतरीन किताब। – पद्मश्री लव राज सिंह धर्मशक्तू, एवरेस्ट विजेता