Order now and enjoy fast, same-day book delivery across Prayagraj. Shop Now
Indigo Books
Criticism

Kavita Ki Arthvatta

J
Author: Jeevan Singh
0.0 (0 reviews)
₹349.00 ₹450.00
Hard Cover
✔ In Stock (2 left)
डॉ. जीवन सिंह की कविता की आलोचना से संबधित यह पांचवीं पुस्तक है। इससे पहले ‘कविता की लोक–प्रकृति’, ‘कविता और कविकर्म’, ‘शब्द और संस्कृति’ तथा ‘मुक्तिबोध—एक मनस्वी कवि’ शीर्षक से वे चार पुस्तकों को सार्वजनिक कर चुके हैं। इसमें समकालीन कविता के नाम से सुपरिचित कुछ कृतियों की आलोचना शामिल हैं। इनमें चूंकि लेखक का कविता की अर्थवत्ता पर विशेष बल है इसलिए उसने कविता में प्रयुक्त शब्द से व्यंजित अर्थों की खासतौर से छानबीन एवं पड़ताल की है। यहाँ लेखक का कविता के शब्द में अनुद्घाटित अर्थ को उद्घाटित करने का प्रयत्न है । जीवन सिंह की आलोचना–दृष्टि में व्यक्ति और समाज के द्वंद्वात्मक रिश्ते को खास जगह रहती है। उनके लिए न व्यक्ति सर्वाेपरि है न समाज। वे मानते हैं कि जब इन दोनों का आपसी रिश्ता जीवन में रहता है तो कविता इससे दूर एकायामी कैसे रह सकती है? यद्यपि व्यक्ति–लेखक कविता की रचना करते हैं किन्तु चूंकि वे समाज का हिस्सा होते हैं इसलिए रचना किसी भी समय और समाज के साथ व्यक्ति के रिश्ते को ही ज़ाहिर करती है। जीवन सिंह ने समाज को भी किसी एक सर्वमान्य रूप में नहीं देखा–समझा है। समाज और उसकी मानसिकता पर पूंजी का प्रभुत्त्व हो जाने के कारण हमारा आज का समाज एक जैसा नहीं रह गया है। वह समतल पर चलने वाला समाज नहीं है। आज वह एक वर्ग‐विभाजित समाज है। उसके भीतर विभिन्न वर्गों के हित एक जैसे नहीं हैं। इन सब बातों को ध्यान में रखकर इस किताब के लेखक का एक परिप्रेक्ष्य बनता है।
₹349.00 ₹450.00
Free delivery Wednesday, 04 November Order today for earliest delivery
Add an address to check delivery availability
or
❤️ Add to Wishlist

Customer Reviews

Write a Review

Please login to post your review.
No reviews yet. Be the first to review this book.

Newsletter

Stay updated with our latest books, special offers, and literary news.