गुलामों की वह दुनिया जिसके बाशिन्दे थे इल्तुतमिश और रजिया सुल्तान
गुलाम कौन थे? वे कहाँ से आए? उनके संघर्ष और आज़ाद हो लेने की उनकी जद्दोजहद क्या थी? ऐसे तमाम सवालों के जवाब तलाशता यह उपन्यास गुलामों के मार्फ़त आज के दौर की सामाजिक-आर्थिक गुलामी की स्थितियों की भी व्याख्या करता है।
विस्तृत शोध, व्यापक अध्ययन और सूक्ष्मतर विवरणात्मकता के साथ 'मामलुक' उपन्यास पाठकों के लिए एक ठोस अनुभव बन जाता है।
तरुण भटनागर ने इस दास्तान को कहने के लिए भी एक ख़ास शैली अपनाई है, जो इसकी पठनीयता को किसी भी मोड़ पर ढीला नहीं पड़ने देती।