Mizaj-E-Banaras : Banaras Ke Bunkar By Vasanti Raman यह किताब बनारस के बुनकरों के जीवन- जगत का एथनोग्राफिक अध्ययन है। इसमें साम्प्रदायिकता और नवउदारवादी आर्थिक नीति के परस्पर जुड़े होने और उसके बुनकरों के दिन-प्रतिदिन के जीवन से लेकर उनके कारोबार पर पड़े नकारात्मक प्रभावों का अन्वेषण किया गया है। इसमें बनारस के मिज़ाज-बनारसीपन और गंगा-जमुनी तहजीब को बनाने और बरकरार रखने में बनारस के बुनकरों की महती भूमिका का ऐतिहासिक अवलोकन किया गया है और बताया गया है कि कैसे बुनकरों की दुनिया के संकटग्रस्त होने के साथ-साथ बनारस का मिज़ाज भी बिगड़ता चला जा रहा है। ऑफिसियल आँकड़ों और फील्ड से जुटायी गयी जानकारी के आधार पर किया गया यह शोध सामाजिक मानवविज्ञान, जेण्डर स्टडीज और दक्षिण एशिया के अध्ययन के क्षेत्र में महत्त्वपूर्ण योगदान है।