‘फूल हरसिंगार वाले’ चिर परिचित कवयित्री अंकिता सिंह की पहली गीतकृति है। विज्ञान-अभियांत्रिकी विषय की पृष्ठभूमि से आने के बावजूद हिंदी कविता के प्रति उनका अगाध प्रेम अद्वितीय है। अपने गीतों के माध्यम से नई पीढ़ी के बीच बीते एक दशक में अंकिता ने सबसे तेज़ी से अपनी स्वीकार्यता को स्थापित किया है। अंकिता पाठ्यक्रम के माध्यम से भी विद्यार्थियों के बीच अपनी उपस्थिति दर्ज कराती हैं। साथ ही, सोशल मीडिया के ज़रिये लाखों श्रोताओं के बीच अपनी गहरी पैठ बनाई है। प्रस्तुत पुस्तक में उन्होंने अपने 51 गीतों और मुक्तकों को संग्रहित किया गया है। यह गीत प्रेम, विरह एवं सामाजिक विषयों से संबंधित हैं। पुस्तक की भूमिका प्रसिद्ध कवि एवं भाषाविद् प्रो. राहुल अवस्थी तथा प्रवेशिका प्रसिद्ध बॉलीवुड लेखक एवं गीतकार मनोज 'मुंतशिर' द्वारा लिखी गई है।
'प्रकृति प्रेम' अंकिता के गीतों का केंद्रीय तत्व एवं प्रेरणास्रोत है। पेड़ों से गिरते पत्तों और सावन में बेलौस गाते परिंदे उनके गीतों में जीवंत विचरण करते दिखते हैं। गीतों के सृजन में उन्होंने अपने भावों के साथ आती मौलिकता को जहाँ कृत्रिम नहीं होने दिया वहीं गीत-परंपरा के नैसर्गिक सिद्धांतों, रस, छंद और अलंकार के नियमों को भी पूरी ज़िम्मेदारी से निभाया है।