फ़राज़ की शायरी की ये किताब जिन बुनियादी जज़्बों, रवय्यों और तेवरों से मिल कर तैयार हुई है, वे प्रतिरोध, संघर्ष और प्रेम हैं। उनकी शायरी से एक रूमानी, एक नव-क्लासीकी, एक आधुनिक और एक बाग़ी शायर की तस्वीर बनती है। उन्होंने इश्क़, मोहब्बत और महबूब से जुड़े हुए ऐसे बारीक एहसासात और जज़्बों को शायरी की ज़बान दी है जो उनसे पहले तक अन-छुए थे। फ़राज़ की शख़्सियत से जुड़ी हुई एक अहम बात ये भी है कि वो अपने समय के सबसे प्रख्यात शायरों में से थे। उनकी शायरी उर्दू में एक नई और अनोखी आवाज़ की हैसियत रखती है।