अपने जीवन में चार समाचारपत्रों के संचालन एवं सम्पादन के दौरान गांधी ने सैकड़ों आलेख लिखे हैं। समाचारपत्रों के साथ उनके पचास वर्ष से भी अधिक के सम्बन्ध के दौरान लिखे गये इन आलेखों के माध्यम से गांधी ने मीडिया के प्रत्येक पक्ष पर न केवल अपने विचार रखे हैं, वरन् इन वर्षों में समाचारपत्र के स्वामी, सम्पादक या पत्रकार के रूप में सत्ता एवं जनता के साथ उनके कार्य-व्यवहार से समाचार मीडिया पर उनकी दृष्टि भी पाठकों को स्पष्ट हो जाती है। गांधी के लिए समाचारपत्र कभी भी जीवनयापन या लाभकमाने का हेतु नहीं रहा। समाचारपत्र उनके लिए सदैव आम जनता को शिक्षित करने और आम जनता अथवा पत्र के पाठकों के हित व दृष्टिकोण को सत्ता और सत्ता से जुड़े अन्य संस्थान के सामने रखना रहा। इसलिए गांधी जनता को सामाजिक, राजनीतिक एवं शैक्षणिक सभी स्तरों पर बेहतर एवं जागरूक करने के लिए निरन्तर प्रयत्नशील दीखते हैं। गांधी की यह स्पष्ट राय है कि अखबारों के माध्यम से ही शासनों को जनता के अभिमत का पता चलता है और यदि समाचारपत्रों पर सेंसरशिप लागू की जाती है तो फिर शासन केवल अपने अधीनस्थों की सूचना पर ही निर्भर रह जाएगा और वास्तविक जानकारी से अपरिचित रहेगा जो स्वयं शासन के लिए ही हितकर नहीं है। समाचारपत्रों की विश्वसनीयता के लिए गांधी स्पष्ट थे कि समाचारपत्र में सच्ची और विश्वसनीय खबरों को ही स्थान मिलना चाहिए। एक जगह उन्होंने यह भी कहा कि यदि खबर जिसे समाचारपत्र आवश्यकता पड़ने पर स्वयं सिद्ध नहीं कर सकते लेकिन उनके अखबार में छपती है तो वह वास्तव में अपराध ही करते हैं। समाचारपत्र अभिव्यक्ति की अपनी स्वतन्त्रता तभी बनाये रख सकता है जबकि किसी अन्य संस्था से प्राप्त होने वाली राशि पर आर्थिक रूप से निर्भर नहीं हो। इसलिए गांधी अखबारों को चलाने के लिए आय के स्रोत के रूप में विज्ञापनों का सहारा लेना उचित नहीं मानते। गांधी के अनुसार समाचारपत्र अपने पाठकों के नियमित ग्राहक शुल्क पर ही चलाया जाना चाहिए और यह समाचारपत्र के पाठकों की जिम्मेदारी है कि यदि वे अपने समाचारपत्र को पसन्द करते हैं तो उसे आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर रखने के लिए नियमित रूप से ग्राहक शुल्क प्रदान करें। … यह पुस्तक युवा पत्रकारों अथवा पत्रकारिता के अध्ययनरत छात्रों के लिए अत्यन्त उपयोगी सिद्ध हो सकती है। वे पत्रकारिता, सम्पादन एवं समाचारपत्र के संचालन के सम्बन्ध में काफी जानकारी इस पुस्तक से प्राप्त कर सकते हैं। – भूमिका से