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Indigo Books
Self Help, Non-Fiction

Samvidhan, Sangh aur Dr. Ambedkar

R
Author: Ram Puniyani
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₹220.00 ₹280.00
Paperback
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अम्बेडकर को राष्ट्र विरोधी बताने वाले वे लोग हैं जिनके पुरखे आजीवन अँग्रेजों की दलाली करते रहे। अँग्रेजी सत्ता से पेंशन पाते रहे। 1942 के भारत छोड़ो आन्दोलन में देश से गद्दारी करते हुए हिन्दुत्ववादियों ने अँग्रेजों का साथ दिया था। इसके बाद उन्होंने सुभाष चन्द्र बोस की आजाद हिन्द फौज के खिलाफ भारतीय नौजवानों को अँग्रेजों की फौज में भर्ती होने के लिए प्रोत्साहित किया था। आरएसएस और अन्य हिन्दुत्ववादियों के इस चरित्र को आज पूरा देश जान चुका है। राष्ट्रवाद और देशभक्ति की खाल ओढ़े ये भेड़िए असल में दलितों और पिछड़ों के खून के प्यासे हैं। रक्तिपपासु ब्राह्मणवाद हमेशा से जाति भेद और शोषण पर ही जिन्दा रहा है। जातियों का संहार होते ही परजीवी ब्राह्मणवाद खुद अपनी मौत मर जाएगा। इसीलिए पुनः सांस्कृतिक वर्चस्व बनाए रखने के लिए जाति व्यवस्था और मनुस्मृति के आधार पर कर्म बहाल करने की घोषणा की जा रही है। डॉ. अम्बेडकर का संविधान इसमें सबसे बड़ी बाधा है। इसलिए वे संविधान को ही मिटा देना चाहते हैं। – भूमिका से
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