कोई भी रिश्ता, फिर चाहे वह व्यक्तिगत हो, व्यावसायिक हो, यदि उस रिश्ते को मज़बूत बनाना हो, उसमें मधुरता लानी हो , तो सामने वाले की बात को ध्यानपूर्वक सुनना अत्यंत आवश्यक है। लेकिन सिर्फ सामने वाले को सुनना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि एक विशिष्ट तरीके से सुनना चाहिए। कैसे? यह आप इस किताब से सीखेंगे। इस किताब में... 1) लोग आपसे खुलकर बात क्यों करेंगे? 2) संवाद के दौरान आपकी बॉडी लैग्वेज़, आपकी आवाज़ का टोन... इसका महत्व 3) सुनने की विभिन्न शैलियां और उनका इस्तेमाल कैसे किया जाता है? 4) आप 'शिफ्ट रिस्पॉन्स' देने वालों में से हैं या 'सपोर्ट रिस्पॉन्स' देने वालों में से हैं? सुनने के पांच स्तर 5) भावनात्मक प्रतिभा (इमोशनल इंटेलिजेन्स)