क्या आप जानते हैं कि भारत के उत्तर-पूर्व में एक ऐसा साम्राज्य भी था जिसने लगभग छह सौ वर्षों तक अपनी सत्ता, संस्कृति और अस्मिता को अक्षुण्ण रखा―और जिसके सामने मुगल साम्राज्य भी कभी स्थायी विजय प्राप्त नहीं कर सका? अहोम साम्राज्य उसी विस्मृत इतिहास की रोमांचकारी, शोधपूर्ण और मानवीय कथा है। सन 1212 में मोंगमाओ से निकले एक विस्थापित राजकुमार सुकाफा की कठिन यात्रा से प्रारंभ होकर 1826 की यांडाबो संधि तक फैली यह पुस्तक ब्रह्मपुत्र घाटी के उस अद्भुत राज्य की कहानी कहती है जिसने आधुनिक असम की नींव रखी। बुरंजियों, शोधग्रंथों, लोककथाओं और वर्षों के अध्ययन पर आधारित यह पुस्तक हिंदी पाठकों के लिए उस इतिहास का द्वार खोलती है जो अब तक मुख्यतः असमिया और अंग्रेज़ी तक सीमित रहा है। इसमें मिलेगा―सुकाफा का उदय, हिंदू और अहोम परंपराओं का संगम, पाइक शासन-व्यवस्था, शंकरदेव के नववैष्णव आंदोलन का प्रभाव, लचित बोरफूकन की वीरता और सराईघाट का निर्णायक युद्ध, मोआमारिया विद्रोह की उथल-पुथल, बर्मी आक्रमण का भयावह दौर और अंततः अंग्रेज़ी सत्ता के अधीन एक महान साम्राज्य का अवसान।