स्वयं प्रकाश के लेखन के पीछे यही प्रेरणा रही है-जो है, उससे बेहतर चाहिए – इंसान, समाज, देश, दुनिया। एक साक्षात्कार में वे कहते हैं-हम एक अधिक सुन्दर, कम क्रूर, अधिक न्यायपूर्ण और अधिक समतापूर्ण समाज बनाने का सपना देखते हैं! जो शक्तियाँ समाज को बाज़ार बना रही हैं, अपने स्वार्थ के लिए इस खूबसूरत नीले ग्रह को बर्बाद कर रही हैं, मनुष्य और मनुष्य के बीच भयानक असमानता पैदा करके हिंसा, लूट, अपराध पैदा कर रही हैं.... उनसे ही तो निपटना है। कलम हाथ में लेकर समतामूलक समाज के स्वप्न के साथ प्रतिबद्धता से अपना पक्ष तय कर हर वंचित के साथ खड़े स्वयं प्रकाश, उस कलम को शोषकों के ख़िलाफ़ लड़ने का हथियार और दुनिया को बदलने का औज़ार बनाते हैं। स्वयं प्रकाश के रचनात्मक जीवन का आरम्भ गीतों से हुआ- रूमानी और क्रान्तिकारी । पहचान मिली उन्हें एक कथाकार के रूप में।