सआदत हसन मंटो अपने बेबाक लेखन के लिए जाने जाते हैं। जो जैसा वे देखते थे वैसा ही लिखते थे बिना किसी लाग-लपेट के, अच्छे को अच्छा और बुरे को बुरा। यह बात उस समय के समाज को गवारा नहीं थी इसलिए उनका बहिष्कार किया गया। । यहाँ तक कि मंटो को अश्लीलता के आरोप में हवालात भी जाना पड़ा । लेकिन मंटो के जाने के 71 वर्षों बाद भी उनकी कलम का बेबाक लेखन आज भी पसन्द किया जाता है। मूलतः वे अफ़सानानिगार थे और उन्होंने अपनी 43 वर्षों की छोटी उम्र में 200 से अधिक कहानियाँ, दो उपन्यास , तीन निबन्ध-संग्रह और अनेक नाटक, रेडियो और फ़िल्म पटकथाएँ लिखीं। फ्रेंच और रूसी लेखकों से प्रभावित, वामपंथी सोच वाले मंटो के लेखन में सच्चाई को ऐसे पेश करने की ताकत है जो लंबे अरर्से तक पाठक के दिलो-दिमाग पर अपनी पकड़ बनाए रखती है। 2012 में हिन्दुस्तान में मनाई गई मंटों की जन्म-शताब्दी इस बात का सबूत है कि मंटो आज भी अपने पाठकों औ प्रशंसकों के लिए ज़िंदा हैं। "ये मर्द ये औरतें" उनका दुर्लभ उपन्यास है जो आदमी और औरत के जटिल रिश्ते को टटोलता है।