बहुमुखी प्रतिभा के रचनाकार असग़र वजाहत के समग्र अवदान पर 'कथा शिखर : असगर वजाहत' में वो सब कुछ है जो एक रचनाकार को जानने के लिए ज़रूरी हो सकता है। स्वयं रचनाकार के आत्मकथ्य, संस्मरण, साक्षात्कार और उनकी सभी प्रमुख कृतियों पर विश्लेषणात्मक आलेख इस पुस्तक को संग्रहणीय बनाते हैं। हिंदी के बहुत सारे जाने-माने लेखकों का रचनात्मक सहयोग सम्पादक पल्लव ने जुटाया है। पुस्तक के सम्पादकीय में उन्होंने असग़र वजाहत के कहानी लेखन को इन शब्दों में रेखांकित किया है: वजाहत ने कहानी लेखन के लिए जो शैली आमतौर पर चुनी है वह है तीखे व्यंग्य के साथ वर्तमान की जटिलताओं का निरूपण बहुत थोड़े शब्दों में कर देना । असग़र वजाहत के लिए प्रख्यात कवि-कथाकार विष्णु नागर ने लिखा हैः असग़र दिल्ली के उन चंद लेखकों में हैं जिनके पास साहित्य की राजनीति करने का समय नहीं है और निःसंकोच कह सकते हैं कि उन्हें आज जितनी प्रतिष्ठा और सम्मान प्राप्त है, वह उनके लेखन की वजह से है, किसी और कारण से नहीं । कभी उन्होंने साहित्य में किसी को उठाने-गिराने के खेल में दिलचस्पी नहीं ली और न ही अपने को प्रमोट किया- करवाया, जो आजकल आम है। असग़र वजाहत के उपन्यासों, नाटकों, कहानियों, यात्रा आख्यानों, निबंधों के साथ उनके चित्रकार स्वरूप पर भी विवेचन इस पुस्तक की विशेषता है। कहना न होगा कि ऐसे महत्वपूर्ण लेखक के विविध वणी रचना-संसार से रू-ब-रू करवाने का यह उपक्रम कौटिल्य बुक्स और सम्पादक पल्लव को सराहना का पात्र बनाता है।