हिन्दी साहित्य में प्रेमचंद एक महत्त्वपूर्ण और अत्यन्त लोकप्रिय साहित्यकार हैं जिन्हें आधुनिक हिन्दी साहित्य का निर्माता भी माना जाता है। उन्होंने अपने जीवन काल में 14 उपन्यास और 300 से अधिक कहानियाँ लिखीं। अधिकतर प्रेमचंद उनके उपन्यास और कहानियों के लिए पाठक याद करते हैं लेकिन उन्होंने निबंध] समीक्षा और बहुत-सी टिप्पणियाँ भी लिखीं। इस पुस्तक में प्रेमचंद के 26 ऐसे निबंध संकलित हैं जो आज भी सामयिक हैं। इन निबंधों से गुज़रते हुए दुख और आश्चर्य] होता है कि सौ साल बीतने के बाद भी हमारे समाज के कई आयामों में कुछ भी बदलाव नहीं हुआ है।