लगभग 'मिथ' से आरम्भ किये गए इस उपन्यास 'पानी पानी' का समापन 'तीसरे कोलाज़ की एक झलक' पर होता है। यह तीसरा कोलाज़ वास्तव में पानी के संदर्भ में तीसरे और निश्चित रूप से अंतिम विश्व युद्ध की पूर्व पीठिका मानी जाएगी। वैसे भी पूरी दुनिया में यह एक कहावत-सी बन चली है कि तीसरा विश्वयुद्ध पानी के लिए ही होगा ।