किसी भी काम को टालना या उस काम के प्रति आलस हमारे जीवन के अनेक सुनहरे अवसरों से हमें वंचित कर देते हैं। टालमटोल वह राक्षस है, जिससे हम बचना तो चाहते हैं, लेकिन हमेशा सफल नहीं हो पाते। हम जीवन में आगे बढ़ने की बजाय और पीछे आ जाते हैं। एक समय ऐसा आता है, जब कामों को टालने की हमारी आदत न सिर्फ हमें ग्लानी से भर देती है, बल्कि समाज में हमारी छवि भी धुमिल कर देती है।
यह किताब आपको कामों को टालने की आदत, अनुशासनहीन प्रवृत्तियों पर मात करने में मदद करती है। आपकी उत्पादक क्षमता बढ़ा कर निर्धारित समय में लक्ष्य को हासिल करने में मदद करती है। टालमटोल के पीछे के जैविक और विकासवादी विज्ञान को उजागर करती है। इन प्रवृत्तियों को सहजता से कैसे हराया जा सकता है और अपने करियर तथा व्यक्तिगत जीवन में कैसे आगे बढ़ सकते हैं, इस विषय में मार्गदर्शन करती है।
इस किताब में जानेंगे
हमारी प्रगति के सबसे बड़े दुश्मन टालमटोल को कैसे पहचाने?
टालमटोल की मानसिकता पर कैसे मात करें?
टालमटोल से निपटने की सही रणनीति क्या है?
टालमटोल की प्रवृत्ति को छोड़ कर अपनी उत्पादकता कैसे बढ़ाएं?